“जो गुनहगार था देवता हो गया...” काशी के कवि धर्मराज सिंह ठाकुर को मिला ‘साहित्य शिल्पी’ सम्मान, 15 कवियों ने बांधा समां | Khabar For You
- DIVYA MOHAN MEHRA
- 02 Nov, 2026
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काशी के युवा कवि धर्मराज सिंह ठाकुर को बीकानेर में ‘साहित्य शिल्पी’ सम्मान, राष्ट्रीय कवि चौपाल की 592वीं कड़ी में सजी भव्य काव्य संध्या | Khabar For You
विश्व शाकाहार दिवस एवं विश्व लेखक दिवस को समर्पित आयोजन में 15 कवियों ने बांधा समां; साहित्य, अध्यात्म और संस्कृति संरक्षण के स्वरों से गूंजा सदन
बीकानेर | 1 नवंबर, 2026 - विश्व शाकाहार दिवस एवं विश्व लेखक दिवस के विशेष अवसर पर स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम ‘राष्ट्रीय कवि चौपाल’ की 592वीं कड़ी साहित्यिक गरिमा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। इस भव्य साहित्यिक समारोह में काशी से पधारे सुप्रसिद्ध युवा कवि धर्मराज सिंह ठाकुर को उनकी सृजनशीलता और साहित्य सेवा के लिए प्रतिष्ठित ‘साहित्य शिल्पी’ सम्मान से नवाजा गया। खुले प्राकृतिक परिवेश में सजी इस चौपाल में कवियों, शायरों और विचारकों की 15 विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित साहित्यानुरागियों का मन मोह लिया।
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खबर की मुख्य बातें (Key Highlights): • राष्ट्रीय कवि चौपाल की 592वीं कड़ी ‘विश्व शाकाहार दिवस’ एवं ‘विश्व लेखक दिवस’ को रही समर्पित। • काशी (वाराणसी) से पधारे युवा साहित्यकार धर्मराज सिंह ठाकुर को ‘साहित्य शिल्पी’ सम्मान प्रशस्ति पत्र, रत्न-जड़ित मोतियन माला व शॉल भेंट कर किया गया सम्मानित। • वंदे मातरम् मंच के संस्थापक अध्यक्ष विजय कोचर ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता; डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान व सरदार अली परिहार रहे विशिष्ट अतिथि। • काव्य गोष्ठी में राजस्थानी अध्यात्म, ग़ज़ल और गीतों सहित कुल 15 शानदार प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध। |
शाकाहार, संस्कृति संरक्षण और साहित्यिक चिंतन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की अध्यक्षता वंदे मातरम् मंच के संस्थापक अध्यक्ष विजय कोचर ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में काशी से पधारे युवा कवि धर्मराज सिंह ठाकुर मंचासीन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान एवं सरदार अली परिहार ने मंच की शोभा बढ़ाई।
समारोह का शुभारंभ करते हुए रामेश्वर साधक ने अपने सारगर्भित स्व-बौद्धिक उद्बोधन में शाकाहार की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शाकाहार स्वयं में न केवल स्वस्थता, प्रसन्नता और सफलता के हेतु सेतु है, वरन् यह सत्कर्म, शतायु और प्रभु-सान्निध्य का स्थायी एवं कालजयी स्तंभ भी है।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए विजय कोचर ने साहित्य की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “साहित्यकार अपने लेखन के माध्यम से संस्कृति का संरक्षण करते हैं, जो पूर्णतः इतिहासपरक और आने वाली पीढ़ियों के लिए पथ-प्रदर्शक होता है।” वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान ने कहा कि साहित्यकारों के लिए ‘राष्ट्रीय कवि चौपाल’ स्वयं में एक सतत प्रेरणा का मंच बन चुका है। विशिष्ट अतिथि सरदार अली परिहार ने जीवन दर्शन का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य और साहित्यकार को सदैव “पानी की तरह तरल, सरल और सर्वकाल उपयोगी” रहना चाहिए।
काशी के साहित्य-स्नेहिल धर्मराज सिंह ठाकुर का ‘साहित्य शिल्पी’ सम्मान से अभिनंदन
समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में राष्ट्रीय कवि चौपाल समूह द्वारा काशी से पधारे साहित्य-स्नेहिल युवा कवि धर्मराज सिंह ठाकुर का भव्य अभिनंदन किया गया। मंचासीन अतिथियों एवं चौपाल परिवार ने उन्हें ‘साहित्य शिल्पी’ सम्मान प्रशस्ति पत्र, रत्न-जड़ित मोतियन माला, श्रीफल, शॉल एवं पुष्प मालाएं भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।
सम्मान के पश्चात मुख्य अतिथि धर्मराज सिंह ठाकुर ने अपनी भावपूर्ण काव्य धारा से सदन में समां बांध दिया। उनकी इन पंक्तियों पर श्रोताओं ने देर तक करतल ध्वनि से स्वागत किया -
“देखते-देखते क्या से क्या हो गया, जो गुनहगार था देवता हो गया। इक दीया मैंने रखी थी दहलीज पर, और सूरज सवेरे ख़फ़ा हो गया।।” — युवा कवि धर्मराज सिंह ठाकुर (काशी) |
ग़ज़ल, अध्यात्म और लोक-संवेदनाओं का संगम: 15 प्रस्तुतियों ने लूटी वाहवाही
काव्य गोष्ठी के दौरान विविध रसों और विषयों पर आधारित रचनाओं ने श्रोताओं को कभी भावुक किया तो कभी आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। प्रमुख कवियों की चर्चित पंक्तियां इस प्रकार रहीं -
• कैलाश टाक: “मैं पढ़ता हूं ज़माने को, मुझे कोई पढ़ नहीं सकता / चढ़ा है रंग तेरी मुहब्बत का, दूजा कोई रंग चढ़ नहीं सकता...”
• अरमान खान (युवा कवि ने पूरे मंच की वाहवाही लूटी): “तेरे आगे ज़िद करता है तेरा लाडला, दुनिया के ग़मों से हारा है / सोचकर रोना आ जाता है, मां के बाद हमारा कौन सहारा है...”
• रामेश्वर साधक: “संभव नहीं बिना गलती किए, बुनियाद से कंगूरों को छुआ है / गलती हुई... मतलब काम तो बना हुआ है...”
• विनीता शर्मा: “किसी को भी बना देना अहिल्या आसान है / किस-किस के आगे आएंगे राम...”
• ज्योति स्वामी (राजस्थानी भाषा में आध्यात्मिक रचना सुनाकर सदन का मन मोह लिया): “रास्तो दोरो होवै तो होवै पण पग कदै नहीं रुके / जिण रौ भरोसो ठाकुर जी माथै होवै, सो कदैई नीं झुके...”
• कृष्णा वर्मा: “एक वक्त था जब हम सबका दर्द सुना करते थे / आज वक्त है हम सबका अवसाद सुना करते हैं...”
• शिव प्रकाश शर्मा: “चंदा करै सूरज, तेरा शीतल प्रकाश सबको अच्छा लगता है...”
• प्रो. सईद अहमद: “साहित्य को जीना और सर्वहित लिखना ही सच्चा जीना-मरना है...”
• पवन चड्ढ़ा: “आधा है चंद्रमा रात आधी, रह न जाए तेरी-मेरी मुलाकात आधी...” सुमधुर गीत गाकर पूरे सदन को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गणमान्य साहित्यानुरागियों की गरिमामयी उपस्थिति एवं सफल संचालन
आज के इस साहित्यिक आयोजन में कुल 15 प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम में चंद्रशेखर सेवग, राधाकिशन सोनी, राजू लखोटिया, सिराजुद्दीन भुट्टा, छोटू खां, घनश्याम सोलंकी, नासिर, नाथू, जरीन, काजल सहित अनेक गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का संचालन कैलाश टाक ने अपने चुटीले और शायराना रसीले अंदाज में किया, जबकि सूचना संवाहक की भूमिका रामेश्वर साधक ने निभाई।
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